LPU में PM मोदी ने गढ़ा नया नारा, जय जवान-जय किसान-जय विज्ञान और
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज एकदिवसीय पंजाब दौरे पर हैं. प्रधानमंत्री ने यहां जालंधर की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में इंडियन साइंस कांग्रेस का उद्घाटन किया. यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जालंधर में ही छात्रों द्वारा बनाई गई ड्राइवरलेस सोलर से चलने वाली बस की सवारी भी करेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां अपने संबोधन में कहा कि आज छात्रों के बीच आकर इस सम्मेलन का उद्घाटन करना मेरे लिए गर्व की बात है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सैकड़ों वर्ष से भारतीय वैज्ञानिक जो काम कर रहे हैं, उसका फायदा देश को मिल रहा है. देश को आगे बढ़ाने में वैज्ञानिकों और छात्रों का काफी अहम रोल है. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश को जय जवान, जय किसान और जय विज्ञान का नारा दिया. प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं इसमें जय अनुसंधान भी जोड़ता हूं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज केंद्र सरकार युवाओं को स्टार्ट अप के लिए प्रेरित कर रही है, इसके लिए मदद भी की जा रही है. प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों की मेहनत के दम पर फसलों की पैदावार बढ़ी है, लेकिन अभी भी न्यू इंडिया की चुनौतियों को देखते हुए इसमें वैज्ञानिक तकनीकों को भी लागू किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के बाद अब ईज ऑफ लिविंग पर काम करना होगा. इसके लिए पीने का पानी, वायु की गुणवत्ता, साइबर सुरक्षा समेत कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां पर सुधार किया जा सकता है, इसके लिए देश के युवाओं को आगे आना होगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है कि हमें दुनिया का नेतृत्व करना चाहिए. उन्होंने कहा कि Big Data, AI, Blockchain से जुड़ी तमाम टेक्नॉलॉजी का कम कीमत में कारगर इस्तेमाल खेती में कैसे हो इस पर हमारा फोकस होना चाहिए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें सिर्फ रिसर्च करने के लिए रिसर्च नहीं करनी है बल्कि अपनी Findings को उस स्तर पर ले जाना है जिससे दुनिया उसके पीछे चले.
जुलाई 2017 को आधी रात से पूरे देश में चार दर (5,12,18,28 फीसदी) वाला जीएसटी लागू किया गया. लेकिन इसे लागू करने के बाद से लेकर अभी तक जीएसटी में दर्जनों बदलाव किए गए. कई बदलावों में अगर कारोबारी को रियायत देने की कवायद हुई तो कुछ बदलावों से आम आदमी पर बोझ को कम करने की कोशिश की गई. लेकिन इन कवायदों से क्या कारोबारी और आम आदमी को फायदा पहुंचा? इस सवाल पर सस्पेंस बरकरार है.
अंशुमान तिवारी का कहना है कि “जीएसटी में रियायतों के बाद उत्पादों या सेवाओं की कीमतें कम हुई भी हैं क्योंकि कंपनियां लागत बढऩे के कारण मूल्य बढ़ा रही हैं. जीएसटी के तहत मुनाफाखोरी रोकने वाला तंत्र अभी शुरू नहीं हुआ जिससे पता चले कि रियायतों का फायदा किसे मिला है.”
तिवारी ने कहा कि “जीएसटी में अभी औसतन 60 फीसदी कारोबारी रिटर्न भर रहे हैं. ई वे बिल लागू होने के बाद पारदर्शिता आने की उम्मीदें भी खेत रही हैं. चुनाव के मद्देजनर टैक्स चोरी पर सख्ती मुश्किल है. लिहाजा जीएसटी की प्रणालियां व नियम अभी तक स्थिर नहीं हैं. इसमें लगातार बदलाव हो रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सैकड़ों वर्ष से भारतीय वैज्ञानिक जो काम कर रहे हैं, उसका फायदा देश को मिल रहा है. देश को आगे बढ़ाने में वैज्ञानिकों और छात्रों का काफी अहम रोल है. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश को जय जवान, जय किसान और जय विज्ञान का नारा दिया. प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं इसमें जय अनुसंधान भी जोड़ता हूं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज केंद्र सरकार युवाओं को स्टार्ट अप के लिए प्रेरित कर रही है, इसके लिए मदद भी की जा रही है. प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों की मेहनत के दम पर फसलों की पैदावार बढ़ी है, लेकिन अभी भी न्यू इंडिया की चुनौतियों को देखते हुए इसमें वैज्ञानिक तकनीकों को भी लागू किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के बाद अब ईज ऑफ लिविंग पर काम करना होगा. इसके लिए पीने का पानी, वायु की गुणवत्ता, साइबर सुरक्षा समेत कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां पर सुधार किया जा सकता है, इसके लिए देश के युवाओं को आगे आना होगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है कि हमें दुनिया का नेतृत्व करना चाहिए. उन्होंने कहा कि Big Data, AI, Blockchain से जुड़ी तमाम टेक्नॉलॉजी का कम कीमत में कारगर इस्तेमाल खेती में कैसे हो इस पर हमारा फोकस होना चाहिए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें सिर्फ रिसर्च करने के लिए रिसर्च नहीं करनी है बल्कि अपनी Findings को उस स्तर पर ले जाना है जिससे दुनिया उसके पीछे चले.
जुलाई 2017 को आधी रात से पूरे देश में चार दर (5,12,18,28 फीसदी) वाला जीएसटी लागू किया गया. लेकिन इसे लागू करने के बाद से लेकर अभी तक जीएसटी में दर्जनों बदलाव किए गए. कई बदलावों में अगर कारोबारी को रियायत देने की कवायद हुई तो कुछ बदलावों से आम आदमी पर बोझ को कम करने की कोशिश की गई. लेकिन इन कवायदों से क्या कारोबारी और आम आदमी को फायदा पहुंचा? इस सवाल पर सस्पेंस बरकरार है.
अंशुमान तिवारी का कहना है कि “जीएसटी में रियायतों के बाद उत्पादों या सेवाओं की कीमतें कम हुई भी हैं क्योंकि कंपनियां लागत बढऩे के कारण मूल्य बढ़ा रही हैं. जीएसटी के तहत मुनाफाखोरी रोकने वाला तंत्र अभी शुरू नहीं हुआ जिससे पता चले कि रियायतों का फायदा किसे मिला है.”
तिवारी ने कहा कि “जीएसटी में अभी औसतन 60 फीसदी कारोबारी रिटर्न भर रहे हैं. ई वे बिल लागू होने के बाद पारदर्शिता आने की उम्मीदें भी खेत रही हैं. चुनाव के मद्देजनर टैक्स चोरी पर सख्ती मुश्किल है. लिहाजा जीएसटी की प्रणालियां व नियम अभी तक स्थिर नहीं हैं. इसमें लगातार बदलाव हो रहे हैं.
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